कॉफी पाउडर की शुद्धता जांचें: चिकोरी, इमली के बीज और खजूर की मिलावट
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अघोषित चिकोरी व इमली के बीज का भराव: शुद्ध फिल्टर या रोस्टेड कॉफी के नाम पर बिकने वाले पाउडर में सस्ती भुनी हुई चिकोरी जड़ (70-80% तक), भुने हुए इमली के बीज, खजूर की गुठली का पाउडर और कैरेमल रंगे इस्तेमाल किए हुए कॉफी वेस्ट की भारी मिलावट की जाती है।
एक पारदर्शी गिलास ठंडे पानी पर आधा चम्मच कॉफी पाउडर बिना हिलाए छिड़कें। शुद्ध कॉफी में प्राकृतिक तेल होने से वह मिनटों तक तैरती रहती है। चिकोरी व इमली के बीज 15 सेकंड में तली में बैठ जाते हैं।
ठंडे पानी में शुद्ध कॉफी तुरंत रंग नहीं छोड़ती। चिकोरी पानी सोखते ही तुरंत गहरे लाल-भूरे रंग की धारियां नीचे छोड़ती है जिससे पानी रंगीन हो जाता है।
गीली उंगलियों के बीच चुटकी भर पाउडर रगड़ें। शुद्ध कॉफी सख्त व दानेदार लगती है; चिकोरी या कैरेमल कोटेड पाउडर उंगली पर चिपचिपा और लसलसा हो जाता है।
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कॉफी पाउडर शुद्धता व चिकोरी-बीज मिलावट जांच
कॉफी पाउडर देश भर में सबसे लोकप्रिय पेय पदार्थों में से एक है। लेकिन ज्यादा मुनाफे के लिए इसमें भुनी हुई चिकोरी जड़, इमली के बीज और खजूर की गुठलियों का पाउडर मिला दिया जाता है।
1. ठंडे पानी का फ्लोट टेस्ट (चिकोरी व बीज मिलावट जांच):
एक कांच के साफ गिलास में सादा ठंडा पानी भरें। पानी की सतह पर आधा चम्मच कॉफी पाउडर हल्के से छिड़कें, चम्मच से बिल्कुल न हिलाएं। शुद्ध कॉफी के कणों में प्राकृतिक फैटी ऑयल्स होते हैं, जिससे वे पानी पर बहुत देर तक तैरते रहते हैं और पानी साफ रहता है। दूसरी ओर चिकोरी, इमली के बीज व खजूर के बीज तुरंत पानी सोखकर 10–15 सेकंड में तली में डूब जाते हैं। चिकोरी नीचे गिरते हुए गहरे भूरे-लाल रंग की धारियां छोड़ती है।
2. आयोडीन स्टार्च टेस्ट (इमली के बीज व अनाज जांच):
एक चम्मच कॉफी पाउडर को 50 मिली पानी में 3 मिनट तक उबालें और पूरी तरह ठंडा होने दें। इसमें 3 से 4 बूंदें मेडिकल टिंचर आयोडीन की डालें। शुद्ध कॉफी में स्टार्च नहीं होता, इसलिए रंग में कोई बदलाव नहीं होगा। यदि मिश्रण तुरंत गहरा नीला, बैंगनी या काला हो जाता है, तो इसमें स्टार्च युक्त इमली के बीज, भुने मक्के या जौ के आटे की मिलावट पक्की है।
3. गीले फिल्टर पेपर पर रंग जांच (कैरेमल डाई टेस्ट):
गीले सफेद फिल्टर पेपर या टिशू पेपर पर थोड़ा कॉफी पाउडर छिड़कें। शुद्ध कॉफी बिना गर्म पानी के ठंडे में रंग नहीं छोड़ती। यदि पेपर पर तुरंत गहरे कत्थई या लाल रंग के धब्बे फैलने लगें, तो इस्तेमाल की गई पुरानी कॉफी में कृत्रिम कैरेमल डाई और चाशनी मिलाई गई है।
4. उंगली का स्पर्श और गंध परीक्षण:
गीली उंगलियों के बीच चुटकी भर पाउडर रगड़ें। शुद्ध कॉफी के कण कठोर, दानेदार और रेत जैसे महसूस होते हैं। चिकोरी या कैरेमल वाला पाउडर उंगलियों पर पिघलकर चिपचिपा पेस्ट बन जाता है। साथ ही शुद्ध कॉफी में भुनी हुई ताजी महक आती है, जबकि मिलावटी पाउडर में जली हुई लकड़ी या मिट्टी जैसी गंध आती है।

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कॉफी पाउडर की ताजगी के 4 चरण और डीगैसिंग
कॉफी का लाजवाब स्वाद और सुगंध उसके ताजे पिसे होने पर निर्भर करता है। हवा और नमी लगने से कॉफी बहुत तेजी से खराब हो जाती है।
ताजगी के 4 चरण:
✅ शिखर ताजगी और ब्लूम (Peak Freshness & Bloom): ताजी भुनी और पिसी कॉफी में प्राकृतिक कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और वाष्पशील सुगंधित तेल प्रचुर मात्रा में होते हैं। गर्म पानी डालते ही झागदार उफान (Blooming) आता है और बेहतरीन महक फैलती है।
⚠️ पुरानी व बेदम कॉफी (Stale / Degassed): पैकेट खुलने के 3–4 हफ्ते बाद गैस निकल जाती है और तेल ऑक्सीडाइज हो जाते हैं। गर्म पानी डालने पर कोई झाग नहीं बनता और स्वाद बेजान या गत्ते जैसा कड़वा होता है।
⚠️ नमी से ढेले बनना (Moisture Clumping): यदि डिब्बा एयरटाइट न हो, तो कॉफी पाउडर हवा की नमी खींचकर सख्त ढेलों (पत्थरों) में बदल जाता है।
❌ फफूंद और मायकोटॉक्सिन सड़न (Spoiled / Mold): नम वातावरण में एस्परगिलस (Aspergillus ochraceus) फंगस पनप जाती है जिससे सीलन भरी बदबू और सफेद-धूसर फफूंद दिखने लगती है। यह किडनी को नुकसान पहुंचाने वाला ओक्राटॉक्सिन ए पैदा करती है। इसे तुरंत फेंक दें।
भंडारण नियम: कॉफी पाउडर को एयरटाइट, अपारदर्शी स्टील या कांच के जार में सूखी जगह रखें। गीली चम्मच कभी न डालें।
Quick Safety Tips
- ठंडे पानी का फ्लोट टेस्ट करें: शुद्ध कॉफी तैरती है और तुरंत रंग नहीं छोड़ती
- जली हुई लकड़ी या सीलन की बदबू वाले कॉफी पाउडर से बचें
- हो सके तो रोस्टेड कॉफी बीन्स खरीदकर घर पर या विश्वसनीय चक्की पर पिसवाएं
- पैकेट पर कॉफी और चिकोरी का सटीक प्रतिशत (जैसे 80:20 या 100% शुद्ध) अवश्य जांचें
Primary Chemical Concerns
Health Risks & Impacts
Multilingual Local Names
Common Storage Pests
कॉफी बेरी बोरर (Hypothenemus hampei)
medium riskकॉफी का प्रमुख कीट जो फल व बीज में छेद करके अंदर घुस जाता है और बीन्स को खाकर चूर्ण बना देता है।
Detection
- कॉफी बीन्स पर सूक्ष्म गोल छेद
- छेद के आसपास काला बुरादा
Prevention
- अच्छी तरह छंटी हुई बीन्स खरीदें
- एयरटाइट कंटेनर में रखें
Corrective Action: What to do?
छेद वाले कीड़े लगे बीन्स को बीनकर अलग कर दें।
एस्परगिलस फफूंद (Aspergillus ochraceus / टॉक्सिन मोल्ड)
high riskनमीयुक्त कॉफी में पनपने वाली फफूंद जो गुर्दे को नुकसान पहुंचाने वाला ओक्राटॉक्सिन ए जहर बनाती है।
Detection
- सीलन भरी बासी बदबू
- पाउडर पर सफेद-धूसर या हरे धब्बे
Prevention
- सूखे जार का इस्तेमाल
- गीले चम्मच व नमी से दूर रखना
Corrective Action: What to do?
फफूंद वाले पाउडर को तुरंत फेंक दें; उबालने पर भी इसका टॉक्सिन खत्म नहीं होता।
Regulatory Corner: FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) / कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया
Regulation: खाद्य सुरक्षा और मानक विनियम 2011, नियम 2.10.2 (शुद्ध कॉफी और कॉफी-चिकोरी मिश्रण)
Legal Limit:शुद्ध कॉफी: न्यूनतम 1.0% कैफीन (शुष्क आधार पर), चिकोरी 0.0%; कॉफी-चिकोरी मिश्रण: न्यूनतम 51% कॉफी (पैकेट पर स्पष्ट घोषणा अनिवार्य), अधिकतम 49% चिकोरी; इमली/खजूर के बीज: 0.0% (शून्य सहनशीलता); ओक्राटॉक्सिन ए: अधिकतम 5.0 µg/kg
Report Adulteration to FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) / कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया